dhar news – नेतागिरी पिटने के बाद कर्मचारियों का विरोधी बन

राकेश साहू, धार। विगत दिनों बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन कार्य के लिए जिला कलेक्टर द्वारा माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल के निर्देशों के पालन में 22 जून से हिंदी का मूल्यांकन करने के आदेश जारी कर, शिक्षकों को मूल्यांकन केंद्र शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय धार में उपस्थित होने के आदेश दिए थे। जिस पर पहले दिन कुछ शिक्षक उपस्थित भी हुए और उन्होंने गृह मूल्यांकन कार्य की मांग करते हुए मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार कर दिया। इस मूल्यांकन कार्य बहिष्कार का अगुआ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ( त्रिवेदी गुट) के अध्यक्ष कैलाशचंद्र चौधरी थे। प्रथम दिवस चौधरी द्वारा उत्कृष्ट विद्यालय धार में पहुंचकर शिक्षकों को उकसाया गया, ऐसा शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है। इस कारण दिनांक 22 जून को मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार होने से सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग धार ने ऐसे अनुपस्थित शिक्षकों को नोटिस जारी किए जिससे कैलाशचंद्र चौधरी की नेतागिरी फैल हो गई। दूसरे दिन उसने फिर से मूल्यांकन केंद्र उत्कृष्ट विद्यालय धार में जाकर शिक्षकों को काली पट्टियां बांटी और कहां कि विरोध करो? कुछ शिक्षकों ने काली पट्टियां बांध ली, लेकिन ज्यादातर ने मूल्यांकन कार्य प्रारंभ कर दिया।
घर से मूल्यांकन करवाने में असफल रहने पर तथा अधिकारियों के सख्त रुख के चलते चौधरी बौखला गये तथा अपनी नेतागिरी फीकी होती दिखी तो अनुपस्थित रहे शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया। लगभग 127 शिक्षक विभिन्न कारणों से नहीं पहुंच पाए, जिसकी उन्होंने सूचना सहायक आयुक्त कार्यालय में दी होगी या मूल्यांकन अधिकारी को दी होगी। इस कारण से उनको सूचना पत्र जारी नहीं किए गए और चौधरी इस बात के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रहे है कि इन 127 शिक्षकों पर क्यों कार्यवाही नहीं की? इनके विरूद्ध भी कार्रवाई की जाए! इस प्रकार चौधरी शिक्षकों का दुश्मन बनकर शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई करवाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रहे है। जो इनकी शिक्षक विरोधी मानसिकता को प्रदर्शित कर रहा है। जबकि जिले के अधिकारी, तथ्यों और वास्तविकता को समझने के बाद ही कोई कार्यवाही करते हैं।
माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा उत्कृष्ट विद्यालय धार में करवाए जा रहे मूल्यांकन कार्य में बिना पास देखें किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जाता है, फिर कैलाश चौधरी कैसे अंदर जाकर शिक्षकों से मिलते रहे। दिनांक 22 जून को भी यह मूल्यांकन केंद्र के अंदर जाकर शिक्षकों के बीच में घूमते फिरते रहे और मूल्यांकन केंद्र उत्कृष्ट विद्यालय के हॉल में अंदर बैठे हुए शिक्षकों, प्राचार्यों आदि को भाषणबाजी भी की और उकसाया। जबकि मूल्यांकन केंद्र के अंदर जाने का अधिकार नहीं है, ना ही चौधरी को कॉपी जांचने के लिए बुलाया गया था। क्या कलेक्टर, चौधरी के मूल्यांकन केंद्र पर अवैधानिक रूप से जाने पर कार्यवाही करेंगे? इसके लिए मूल्यांकन केंद्र प्रभारी भी जिम्मेदार हैं।
कैलाश चौधरी पहले से ही विवादित रहै है, तथा तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ में भी स्व पालीवाल के समय भी उनके खिलाफ शिकायतें करवाई थी। अब चौधरी ने हाल में ही एक दूसरे संघ में लगभग 12 लोगों को मोहरा बनाकर उनका भी नुकसान करवाने की तैयारी कर दी है। अभी मूल्यांकन कार्य में शिक्षकों को भड़काकर उनका नुकसान करवा दिया। जो बच गए उन पर कार्यवाही के लिए दबाव बनाकर उनका नुकसान करवाने का प्रयास कर रहे है। ऐसी जानकारी है कि यदि पहले दिन मूल्यांकन का बहिष्कार नहीं होता तो ये थोक बंद नोटिस भी नहीं दिए जाते।
         खुद को सभी का ठेकेदार समझने वाला कुंठित कैलाशचंद्र चौधरी ने पहले भी कुछ लोगों के साथ मिलकर पत्रकारों के विरुद्ध ज्ञापन दिया था। जिसमें बाद में इसकी भारी थू थू हुई थी, लेकिन ये अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे है। पहले पत्रकार विरोधी कार्य किया था और अब कर्मचारी विरोधी कार्य कर रहे हैं और कर्मचारियों का नुकसान करवाने पर आमादा हैं।

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